बदहाली के आंसू रो रहा महनई का उप-स्वास्थ्य केंद्र: साल भर से लटका है ताला, कचरे के ढेर में तब्दील हुई दवाइयां
बगीचा/महनई:
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का दावा किया जा रहा है, लेकिन बगीचा ब्लॉक के ग्राम पंचायत महनई में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। यहाँ स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्र पिछले एक साल से बंद पड़ा है, जिससे ग्रामीणों को मामूली इलाज के लिए भी कोसों दूर भटकना पड़ रहा है।
खंडहर में तब्दील केंद्र, दवाइयां बन रहीं कचरा
स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति वर्तमान में दयनीय हो चुकी है। साल भर से ताला बंद होने के कारण अस्पताल परिसर में धूल और जाले जम चुके हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्र के भीतर जीवन रक्षक दवाइयां और चिकित्सा उपकरण किसी कीमती संसाधन के बजाय कचरे की तरह बिखरे पड़े हैं। देख-रेख के अभाव में लाखों रुपये की सरकारी दवाइयां खराब हो रही हैं, जो सीधे तौर पर शासन के बजट और जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

स्टाफ का अता-पता नहीं, ग्रामीण परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि यहाँ न तो कोई डॉक्टर आता है और न ही नर्स या अन्य स्टाफ। उप-स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद महनई और आसपास के गांव के लोगों को सर्दी, खांसी या बुखार जैसी बीमारियों के लिए भी निजी क्लिनिकों या शहर के चक्कर काटने पड़ते हैं। आपातकालीन स्थिति में गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को होने वाली परेशानी का कोई अंत नहीं है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्वास्थ्य विभाग की इस घोर लापरवाही ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ग्रामीणों की मांग:
"हमारी मांग है कि महनई उप-स्वास्थ्य केंद्र को तत्काल प्रभाव से खोला जाए, यहाँ पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति हो और जो दवाइयां बर्बाद हुई हैं, उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।"
अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटती है या महनई के ग्रामीण इसी तरह भगवान भरोसे रहने को मजबूर रहेंगे।


