जशपुर 'कमीशन कांड' में नया मोड़: भ्रष्ट सिस्टम को बचाने के लिए कार्यकर्ताओं को नौकरी से निकालने की धमकी! परामर्शदात्री की बैठक में कलेक्टर ने कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं को किया जागरूक और इधर शिकायत के बाद डीपीओ ने शिकायतकर्ताओं को ही जारी किया नोटिस,मामले में संघ ने किया SIT जांच और नार्को टेस्ट का मांग
जशपुरनगर : जशपुर जिला अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग अब भ्रष्टाचार का अड्डा नहीं, बल्कि आहिस्ते आहिस्ते अब साजिशों का केंद्र बनता जा रहा है। पर्यवेक्षक दिव्या बड़ा द्वारा 30% कमीशन मांगे जाने की शिकायत करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब सीधे 'नौकरी से निकालने' की धमकी दी जा रही है। जिला प्रशासन के सुशासन के दावों के बीच, विभाग के कुछ सफेदपोश कर्मचारी अब सबूतों से छेड़छाड़ करने और गवाहों को डराने के 'गंदे खेल' में उतर आए हैं।
*कलेक्टर ने गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाने किया प्रतीत और इधर डीपीओ ने बिना जांच किए शिकायतकर्ताओं को ही थमाया 'धमकी भरा नोटिस'?*
हैरानी की बात यह है कि जब 1 अप्रैल 2026 को संघ ने कलेक्टर रोहित व्यास और DPO अजय शर्मा को लिखित शिकायत सौंपी, तो विभाग को तत्काल जांच कर दोषियों को निलंबित करना चाहिए था। लेकिन इसके उलट, DPO अजय शर्मा ने जांच करना मुनासिब नहीं समझा और शिकायतकर्ताओं को ही 7 दिन के भीतर 'नोटिस' थमा दिया। इस नोटिस में "क्यों न आपको कार्य से पृथक कर दिया जाए" जैसे डराने वाले शब्दों का प्रयोग कर शिकायतकर्ताओं की आवाज दबाने की पुरजोर कोशिश की गई।जब 13 शिकायतकर्ताओं ने लिखित में गंभीर आरोप भरा ज़वाब डीपीओ को दिनांक 08/04/26 को प्रस्तुत कर दिया है तो आज पर्यंत तक इस पर आगे की उचित कार्यवाही करना डीपीओ ने मुनासिब नहीं समझा है,इसमें सबसे हैरानी वाली बात यह भी सामने आई है कि एक तरफ परामर्शदात्री की बैठक में कलेक्टर ने सभी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं को जागरूक कर गलत कार्यों का पुरजोर विरोध कर आवाज उठाने प्रेरित किया है वहीं जब ये लोग आवाज उठा रहे है तो इन्हें ही नोटिस तलब कर आवाज दबाने का कार्य विभाग द्वारा किया जा रहा है।

*SIT जांच और नार्को टेस्ट की मांग : दूध का दूध और पानी का पानी हो!*
विभाग के इस रवैये और कर्मचारियों द्वारा जवाब बदलने के दबाव लगातार बनाए जाने से आक्रोशित शिकायतकर्ताओं ने मामले की शिकायत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ (पंजी. 409) से की है,जिस पर संघ ने जिले भर से ऐसे प्रकरणों की पूरी लिस्ट भी तैयार की है जिसमें विभाग के बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आने की आशंका है।मामले में जिले के अधिकांश परियोजना से कार्यकर्ताओं ने संघ को भ्रष्टाचार की शिकायत की है जिसके बाद अब आर-पार की जंग छेड़ दी है। संघ ने शासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्षता के लिए SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया जाए ,साथ ही भ्रष्टाचार की परतें खोलने के लिए विभाग के आरोप लगे संदिग्ध कर्मचारियों और सभी 26 शिकायतकर्ताओं का नार्को टेस्ट कराया जाए।
*सूत्रों का बड़ा खुलासा : 'जवाब बदलो वरना नौकरी जाएगी'*
सूत्रों के हवाले से खबर है कि विभाग के भीतर एक 'सिंडिकेट' सक्रिय है, जो उन 13 कार्यकर्ताओं पर दबाव बना रहा है जिन्होंने 8 अप्रैल को करारा जवाब दाखिल किया था। कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है कि यदि उन्होंने बयान नहीं बदला, तो उन्हें सेवा से बाहर कर दिया जाएगा। इस 'ब्लैकमेलिंग' की शिकायत भी अब संघ तक पहुँच चुकी है।सूत्रों का दावा है कि इस वक्त सबूतों के साथ इस मामले को संघ में प्रमुखता से रखा गया है जिसे आधार बना कोर्ट में भी जाने का रास्ता संघ तैयार कर रहा है।जरूरत पड़ने पर संघ के द्वारा सभी 8 हजार कार्यकर्ताओं सहायिकाओं के साथ सड़कों में का भी योजना तैयार किया गया है
*कलेक्टर की जागरूकता पर आईसीडीएस विभाग पानी फेरने को तैयार!*
25 फरवरी 2026 को कलेक्टर रोहित व्यास ने परामर्शदात्री की बैठक में कार्यकर्ताओं द्वारा उठाए गए यात्राभत्ता में पैसे की मांग के शिकायत पर कहा था कि कोई भी कार्यकर्ता सहायिका से इस प्रकार की पैसे की मांग करना गलत है जो भी मांग करता है यदि उसके विरुद्ध लिखित शिकायत सामने आता है तो संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किया जाएगा,उक्त बैठक के बाद जिले भर में कार्यकर्ताओं सहायिकाओं में न्याय के लिए उम्मीद की किरण जागी,सभी ने साहस का परिचय देते हुवे जशपुर कलेक्टर पर भरोसा जता गलत के विरुद्ध आवाज उठाया और संघ के माध्यम से लिखित शिकायत कलेक्टर एवं डीपीओ को किया है।उक्त शिकायत के 24 घंटे के भीतर ही शिकायतकर्ताओं को डीपीओ ने बिना जांच के नोटिस जारी कर दिया है।जिसका जवाब सभी शिकायतकर्ताओं ने समय रहते प्रस्तुत भी किया।लेकिन आज पर्यंत तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है न हे दोषियों के विरुद्ध किसी प्रकार का जांच किया गया बल्कि रोजाना किसी न किसी माध्यम से शिकायतकर्ताओं को शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।एक तरफ कलेक्टर के भरोसे पर कार्यकर्ताओं ने हिम्मत दिखाई,वहीं दूसरे तरफ विभाग के आला अधिकारी अब कार्यकर्ताओं की उसी हिम्मत को कुचलने में लगे हैं।
बड़ा सवाल: जब शिकायतकर्ता नार्को टेस्ट तक देने को तैयार हैं, तो विभाग जांच से क्यों भाग रहा है? क्या 30% कमीशन की इस मलाई में ऊपर तक हिस्सेदारी है?
*जशपुर कलेक्टर से न्याय की उम्मीदें,टिकी सभी की निगाहें*
जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास के द्वारा जागरूक किए जाने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं ने गलत के विरुद्ध बमुश्किल आवाज उठाने का हिम्मत जुटाया है वहीं मामले में अभी तक कोई कार्यवाही नहीं किए जाने और शिकायतकर्ताओं पर दबाव बने जाने से न्यायप्रणाली पर अब सवालिया निशान उठ रहा है।मामले में जशपुर कलेक्टर से न्याय का उम्मीद सभी कार्यकर्ताओं ने लगाया है,जिनके द्वारा जागरूक किए जाने पर सभी आवाज उठा सामने आए हैं।इस मामले में जिलेवासियों की नजर टिकी हुई है,आने वाला समय ही बयां करेगा कि इसमें प्रशासन क्या कार्यवाही करता है।
*छुट्टी से लौटते ही DPO ने संभाला मोर्चा, सोमवार-मंगलवार को होगी अहम सुनवाई*
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जिला कार्यक्रम अधिकारी अजय शर्मा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि वे पिछले कुछ दिनों से अवकाश पर थे और आज ही उन्होंने कार्यभार संभाला है। शिकायतों और नोटिस के जवाब पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा:
"हमने सभी संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण मांगा है। मैं अवकाश पर था, आज ज्वाइन किया हूं। आगामी सोमवार या मंगलवार को दोनों पक्षों को बुलाया जाएगा। सभी को स्पष्टीकरण जारी किया गया है, उनके जवाब के आधार पर ही आगे की कार्यवाही प्रस्तावित की जाएगी।"
बड़ा सवाल: सोमवार को होगा न्याय या बढ़ेगा विवाद?
DPO द्वारा सोमवार और मंगलवार को बुलाई गई बैठक पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। क्या विभाग वास्तव में 30% कमीशन मांगने वाली पर्यवेक्षक पर गाज गिराएगा या फिर जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति कर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?
संपादकीय टिप्पणी : न्याय की उम्मीद में बैठी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को डराना लोकतांत्रिक अधिकार और प्रशासनिक शुचिता का अपमान है। अगर विभाग ने निष्पक्ष जांच के बजाय कार्यकर्ताओं को बलि का बकरा बनाया, तो यह आंदोलन जशपुर की सीमाओं को लांघकर प्रदेश स्तर पर तबाही मचाएगा।
यह घटना जशपुर के प्रशासनिक इतिहास का सबसे शर्मनाक अध्याय है, जहाँ न्याय मांगने वाली महिलाओं को 'एहसानमंद' बनाने के बजाय 'अपराधी' बनाने की कोशिश हो रही है। यदि मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह आंदोलन जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक एक बड़े मुहिम के रूप में छिड़ सकता है
प्राइम पल्स न्यूज़ ऋषि संतोष थवाईत आपके साथ हर कदम पर
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