पीएमजीएसवाई की सड़क या 'मौत का जाल'? भूरसाढाब-नकबार मार्ग पर ठेकेदार की मनमानी से बढ़ रहा हादसों का ग्राफ

पीएमजीएसवाई की सड़क या 'मौत का जाल'? भूरसाढाब-नकबार मार्ग पर ठेकेदार की मनमानी से बढ़ रहा हादसों का ग्राफ

कांसाबेल/जशपुर:

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत करोड़ों की लागत से बनी भूरसाढाब से नकबार तक की सड़क अब राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। सड़क निर्माण तो कागजों और धरातल पर पूरा दिख रहा है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही ने इसे दुर्घटना के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। सड़क के दोनों ओर महीनों से पड़े मिट्टी और मलबे के ढेर अब आम जनता के लिए काल साबित हो रहे हैं।

यह एक रिनिवल रोड है और सूचना पटल में भी कुछ नहीं लिखा गया है 

अधिकारियों के निर्देशों को ठेंगा दिखा रहा ठेकेदार

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की बेबसी है। सूत्रों के मुताबिक, विभागीय इंजीनियर और एसडीओ (SDO) द्वारा संबंधित ठेकेदार को फोन के माध्यम से कई बार मलबा हटाने और कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। बावजूद इसके, ठेकेदार की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं दिख रहा। ठेकेदार की इस 'हठधर्मिता' और मनमानी के आगे विभाग बौना नजर आ रहा है, जिसका खामियाजा क्षेत्र की जनता भुगत रही है।

सड़क पर फैला मलबा, रात में बढ़ जाता है खतरा

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के बाद किनारों (साइड्स) की सफाई नहीं की गई। अब यह मिट्टी धीरे-धीरे मुख्य मार्ग तक फैल चुकी है, जिससे सड़क की प्रभावी चौड़ाई कम हो गई है।

दोपहिया वाहन चालक: मिट्टी के कारण गाड़ियां फिसल रही हैं।

रात का सफर: रोशनी की कमी के कारण अंधेरे में ये ढेर दिखाई नहीं देते, जिससे अनियंत्रित होकर वाहन पलटने का डर बना रहता है।

तकनीकी खामी: रोड साइडर व्यवस्थित न होने से पहली बारिश में ही सड़क के धंसने और खराब होने की पूरी आशंका है।

आंदोलन की राह पर ग्रामीण

भूरसाढाब और नकबार के निवासियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। ग्रामीणों का कहना है कि क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जागेगा? उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द सड़क किनारे से मलबा नहीं हटाया गया और रोड साइडर दुरुस्त नहीं किए गए, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और उच्चाधिकारियों से इसकी लिखित शिकायत कर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग करेंगे।

"करोड़ों की लागत से रोड तो बन गई, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही ने इसे खतरनाक बना दिया है। इंजीनियरों और एस डी ओ के बोलने के बाद भी काम न होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है।" — स्थानीय ग्रामीण