जशपुर: नकबार छात्रावास अधीक्षक की सफाई में 'स्वीपर' और 'रसोइया' की मांग गायब, ग्रामीणों ने फिर उठाए सवाल
कांसाबेल: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के ग्राम पंचायत नकबार में स्थित 50 सीटर बालक छात्रावास विवादों के घेरे में है। ग्रामीणों द्वारा छात्रावास की बदहाली और अनियमितताओं की शिकायत के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने अधीक्षक को नोटिस जारी किया था, लेकिन अब इस मामले में एक नया मोड़ सामने आया है।

ग्रामीणों की मूल शिकायत और मांगें
ग्रामीणों ने 13 जनवरी 2026 को विकासखंड स्रोत केंद्र में लिखित आवेदन देकर छात्रावास की गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया था:
- कर्मचारियों का अभाव: छात्रावास में नियमित स्वीपर और रसोइया (Cook) की नियुक्ति की स्पष्ट मांग की गई थी।
- कार्य का बोझ: वर्तमान में रसोइया और चौकीदार द्वारा ही खाना बनाने के साथ-साथ साफ-सफाई का कार्य भी किया जा रहा है।
- समिति का गठन: स्कूल खुलने के समय से ही शाला प्रबंधन एवं विकास समिति का गठन नहीं किया गया है।
- नियुक्ति में मनमानी: पूर्व अधीक्षक द्वारा एक ही घर से पति-पत्नी को पार्ट-टाइम टीचर के रूप में नियम विरुद्ध रखने का आरोप है।
स्पष्टीकरण से महत्वपूर्ण मांगें 'गायब'
ग्रामीणों की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए BEO कांसाबेल ने 20 जनवरी 2026 को अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर 5 दिनों में जवाब मांगा था। हालांकि, यह बात सामने आई है कि अधीक्षक द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण में स्वीपर और रसोइया की मांग के महत्वपूर्ण बिंदु को कथित तौर पर छिपाया गया है, जबकि ग्रामीणों के आवेदन में यह प्रमुखता से दर्ज था।

ग्रामीणों में आक्रोश
अधीक्षक द्वारा मूल मांगों को नजरअंदाज करने और स्पष्टीकरण में तथ्यों को छिपाने के प्रयास से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक छात्रावास में स्थाई रसोइया और स्वीपर की नियुक्ति नहीं होती और समिति का पारदर्शी गठन नहीं होता, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग अधीक्षक के इस 'अधूरे' स्पष्टीकरण पर क्या कड़ा रुख अपनाता है और क्या ग्रामीणों की जायज मांगों को पूरा किया जाता है।





