बड़ी खबर: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत में ESMA लागू; घरेलू गैस की निर्बाध आपूर्ति के लिए सरकार सख्त
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश के भीतर ऊर्जा सुरक्षा और आम जनजीवन को प्रभावित होने से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA), 1968 को पूरे देश में प्रभावी कर दिया है।
इस फैसले का प्राथमिक उद्देश्य घरेलू गैस (LPG) की आपूर्ति को बिना किसी बाधा के सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को भी लागू कर दिया है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम कसी जा सके।
कंपनियों को कड़े निर्देश: LPG उत्पादन बढ़ाएं
सरकार ने तेल रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कंपनियों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं:
- अधिकतम उत्पादन: सभी कंपनियों को LPG का उत्पादन अपनी पूरी क्षमता से करने को कहा गया है।
- संसाधनों का डायवर्जन: हाइड्रोकार्बन प्रोडक्शन यूनिटों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी प्रक्रियाओं को एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़ दें।
- सप्लाई चेन: वितरण नेटवर्क में किसी भी तरह की देरी या कोताही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या है ESMA और यह क्यों है इतना ताकतवर?
एस्मा (ESMA) एक ऐसा कानून है जिसका उपयोग सरकार तब करती है जब अनिवार्य सेवाओं के बाधित होने का खतरा होता है।
कानून के मुख्य प्रावधान:
- हड़ताल पर पूर्ण रोक: एस्मा लागू होने के बाद संबंधित सेवाओं के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकते। काम से इनकार करना अवैध माना जाता है।
- बिना वारंट गिरफ्तारी: पुलिस के पास यह अधिकार होता है कि वह कानून का उल्लंघन करने वाले या हड़ताल के लिए उकसाने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सके।
- सजा और जुर्माना: उल्लंघन करने वालों को एक वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। इसके अलावा सेवा से बर्खास्तगी जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
- अवधि: यह कानून एक बार में अधिकतम 6 महीने के लिए लगाया जा सकता है।
इन सेवाओं पर पड़ता है असर:
- सार्वजनिक परिवहन (बस, रेलवे)
- स्वास्थ्य सेवाएं (डॉक्टर, नर्स और अस्पताल)
- ऊर्जा क्षेत्र (पेट्रोलियम, कोयला, बिजली)
- बैंकिंग और पेयजल आपूर्ति
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का प्रभाव
एस्मा के साथ-साथ सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम भी लागू किया है। इसके तहत सरकार दवाओं, उर्वरक, खाद्य तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और बीजों की आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित करेगी।
विशेष नोट: 2020 के संशोधन के अनुसार, अनाज, दालें और प्याज जैसी वस्तुओं को केवल युद्ध, अकाल या असाधारण मूल्य वृद्धि जैसी स्थितियों में ही विनियमित किया जा सकता है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने इन शक्तियों का प्रयोग शुरू कर दिया है।





