मुनगाडीह पंचायत में 15वें वित्त की राशि पर 'डाका': कागजों पर हुआ विकास, हकीकत में भ्रष्टाचार का 'मोहनबाजा'

मुनगाडीह पंचायत में 15वें वित्त की राशि पर 'डाका': कागजों पर हुआ विकास, हकीकत में भ्रष्टाचार का 'मोहनबाजा'

कोरबा/पाली: शासन की योजनाओं को पलीता लगाने और सरकारी खजाने को निजी तिजोरी समझने का खेल ग्राम पंचायत मुनगाडीह में धड़ल्ले से चल रहा है। 15वें वित्त आयोग की राशि, जो गांव की बुनियादी सूरत बदलने के लिए आवंटित की गई थी, उसे सरपंच और सचिव ने मिलकर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया है। आलम यह है कि धरातल पर काम शून्य है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में लाखों रुपये स्वाहा किए जा चुके हैं।

कागजी घोड़े दौड़ाकर निकाली गई लाखों की राशि

​भ्रष्टाचार की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि अधिकारी भी इसे देखकर हैरान रह जाएं, बशर्ते वे अपनी आंखें खोलें। पंचायत द्वारा किए गए फर्जीवाड़े के कुछ प्रमुख नमूने इस प्रकार हैं:

  • अस्तित्वहीन भवनों का 'जीर्णोद्धार': प्राथमिक शाला में अतिरिक्त कक्ष के नाम पर 68,000 रुपये निकाले गए, जबकि गांव की तीनों प्राथमिक शालाओं में ऐसा कोई कक्ष अस्तित्व में ही नहीं है। वहीं चारपारा में 17,000 रुपये का निर्माण कार्य कागजों तक ही सीमित रहा।
  • शौचालय के नाम पर ठगी: मिडिल स्कूल में शौचालय मरम्मत और मजदूरी के नाम पर 42,000 रुपये डकारे गए, जबकि हकीकत में दोनों शौचालय आज भी अनुपयोगी और जर्जर हैं।
  • पेयजल योजना में भारी सेंध: धनुहारपारा, बिंझवारपारा और बगईनाला जैसे क्षेत्रों में सबमर्सिबल पंप और टंकी स्थापना के नाम पर लाखों रुपये (70,605 + 35,800 + 26,000) निकाल लिए गए, लेकिन मौके पर एक भी नया पंप या टंकी नहीं लगी है।
  • नाली सफाई और मरम्मत का खेल: बस्तीपारा, चारपारा और बंधियापारा में नाली सफाई के नाम पर 81,258 रुपये और नाली मरम्मत (तिथि 29/11/2025) के नाम पर 25,400 रुपये आहरित किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि नालियों की स्थिति आज भी नारकीय है।

3 लाख का पाइपलाइन विस्तार: सवा लाख का काम, दोगुना भुगतान

​भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण सुखनंदन के घर से विष्णु के घर तक बिछाई गई पाइपलाइन है। यहां महज 150-200 मीटर प्लास्टिक पाइप बिछाने के नाम पर 02/07/2025 से 08/08/2025 के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 3,09,908 रुपये निकाल लिए गए। ग्रामीणों के अनुसार इस कार्य की अधिकतम लागत डेढ़ लाख से अधिक नहीं हो सकती, लेकिन सरपंच-सचिव ने दोगुनी से अधिक राशि डकार ली।

अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

​सबसे बड़ा सवाल यह है कि मामला मीडिया में आने और ग्रामीणों द्वारा विरोध दर्ज कराने के बावजूद जनपद और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में क्यों सोए हैं? ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बिना जनपद अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला मुमकिन नहीं है। क्या साय सरकार के 'सुशासन' के दावों को ये भ्रष्ट अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि इसी तरह चुनौती देते रहेंगे?

"यदि मुनगाडीह पंचायत के कार्यों की निष्पक्ष जांच और भौतिक सत्यापन कराया जाए, तो भ्रष्टाचार की एक ऐसी 'काली गाथा' सामने आएगी जो जिला प्रशासन के होश उड़ा देगी।"ग्रामीण, मुनगाडीह

​अब देखना यह है कि इस खबर के बाद प्रशासन जागता है या भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है।