झूठे निकले CMHO के वादे: महनई उप-स्वास्थ्य केंद्र पर साल भर से लटका ताला, कचरे के ढेर में तब्दील हुईं सरकारी दवाइयां

झूठे निकले CMHO के वादे: महनई उप-स्वास्थ्य केंद्र पर साल भर से लटका ताला, कचरे के ढेर में तब्दील हुईं सरकारी दवाइयां

चंद्र भान यादव की कलम से 

बगीचा/महनई:

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली अब तमाशबीन बनकर रह गई है। कागजों पर 'स्वास्थ्य क्रांति' का ढिंढोरा पीटने वाले अफसरों की हकीकत जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक के ग्राम पंचायत महनई में देखी जा सकती है। यहाँ का उप-स्वास्थ्य केंद्र पिछले एक साल से भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है। विडंबना देखिए कि जिस अस्पताल को ग्रामीणों की जान बचानी थी, वह खुद अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है।

CMHO का आश्वासन निकला 'हवाई', ग्रामीणों के साथ हुआ बड़ा धोखा

​हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले पर पूर्व में भी खबरें प्रकाशित की गई थीं। उस वक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने बड़ी तत्परता दिखाते हुए यह 'जुमला' उछाला था कि 8 अप्रैल तक महनई उप-स्वास्थ्य केंद्र को हर हाल में संचालित कर दिया जाएगा और स्टाफ की तैनाती कर दी जाएगी। लेकिन आज हफ्तों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है। CMHO का निर्देश महज एक रद्दी कागज का टुकड़ा साबित हुआ, क्योंकि आज तक न तो वहां कोई ताला खोलने पहुंचा और न ही किसी जिम्मेदार ने सुध ली।

लाखों की दवाइयां बन रहीं कचरा, शासन के बजट की बर्बादी

​अस्पताल के भीतर का नजारा किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है। धूल फांकते मेडिकल उपकरण और कचरे के ढेर में तब्दील हो चुकी जीवन रक्षक दवाइयां स्वास्थ्य विभाग के मुंह पर तमाचा मार रही हैं। देख-रेख के अभाव में लाखों रुपये की दवाइयां एक्सपायरी डेट की ओर बढ़ रही हैं या सड़ चुकी हैं। जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा किस तरह महनई के बंद कमरों में सड़ रहा है, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।

न डॉक्टर, न नर्स: भगवान भरोसे ग्रामीण

​महनई और आसपास के हजारों ग्रामीण मामूली सर्दी-बुखार के लिए भी दर-दर भटकने को मजबूर हैं। आपातकालीन स्थिति में गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को कोसों दूर शहर ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार जान पर बन आती है। सवाल यह उठता है कि जब स्टाफ को वेतन मिल रहा है, तो उनकी ड्यूटी महनई के बजाय कहाँ लगी है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

प्रशासन की चुप्पी और बढ़ता जनाक्रोश

​ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर है। उनका कहना है कि विभाग के आला अधिकारी केवल कुर्सी पर बैठकर झूठे आश्वासन देना जानते हैं। जमीनी स्तर पर जनता को इलाज के नाम पर सिर्फ खाली इमारतें थमा दी गई हैं। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही केंद्र को चालू नहीं किया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

"CMHO ने 8 अप्रैल का वादा किया था, लेकिन वो भी झूठा निकला। हमारे यहाँ के बच्चे और बुजुर्ग बिना इलाज के परेशान हैं। आखिर शासन हमें इंसान कब समझेगा?" > — व्यथित ग्रामीण, महनई

​अब देखना होगा कि इस खबर के बाद कुंभकर्णी नींद में सोया स्वास्थ्य विभाग जागता है या फिर महनई की स्वास्थ्य व्यवस्था इसी तरह खंडहरों में दफन रहेगी।