खबर का बड़ा असर: वेब पोर्टलों पर खबर चलते ही हिला विभाग, कलेक्टर के तेवर सख्त—वसूली करने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज!

खबर का बड़ा असर: वेब पोर्टलों पर खबर चलते ही हिला विभाग, कलेक्टर के तेवर सख्त—वसूली करने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज!

जशपुरनगर: लुड़ेग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा अधिकारियों की तानाशाही और कमीशनखोरी के खिलाफ बुलंद की गई आवाज का बड़ा असर देखने को मिला है। वेब पोर्टलों और सोशल मीडिया पर खबर के वायरल होते ही जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में प्रशासन को सफाई और सख्त कार्यवाही के निर्देश जारी करने पड़े हैं।

वेब पोर्टलों की खबर ने उड़ाई नींद

​बीते दिनों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ (पंजी. 409) की बैठक में अधिकारियों द्वारा 'अनैतिक मांग' और 'वित्तीय अनियमितता' के जो आरोप लगाए गए थे, उन्हें मीडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर का प्रभाव इतना गहरा रहा कि विभाग के भीतर चल रहे 'कमीशन के खेल' की चर्चा शासन के गलियारों तक पहुँच गई, जिसके बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी ने मोर्चा संभाला।

कलेक्टर की 'डेडलाइन': भ्रष्टाचार किया तो नपेंगे अधिकारी

​खबर पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि:

  • शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance): कार्यकर्ताओं या सहायिकाओं से किसी भी प्रकार की वसूली या कमीशन की मांग को 'अपराध' माना जाएगा।
  • कठोर कार्यवाही: सभी परियोजना अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और लिपिकीय स्टाफ को निर्देशित किया गया है कि यदि किसी ने भी अनैतिक दबाव बनाया, तो उन पर कठोर अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

समाधान की ओर कदम: अब होगी नियमित मॉनिटरिंग

​प्रशासन ने अपनी छवि सुधारते हुए जानकारी दी है कि कार्यकर्ताओं की समस्याओं के निराकरण के लिए बैठकों का दौर जारी है। 25 फरवरी को हुई बैठक के बाद अब भविष्य में भी नियमित अंतराल पर संवाद किया जाएगा ताकि कोई भी बिचौलिया या अधिकारी कार्यकर्ताओं का शोषण न कर सके।

मीडिया की ताकत: कार्यकर्ताओं में जगी उम्मीद

​सोशल मीडिया और वेब पोर्टलों पर खबर प्रकाशित होने के बाद कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। संघ की जिलाध्यक्ष श्रीमती कविता यादव और उनकी टीम की इस मुहिम ने भ्रष्ट अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। प्रशासन के इस ताजा आदेश के बाद अब ज़मीनी स्तर पर बदलाव की उम्मीद जगी है।

संपादकीय पंच: जब मीडिया जनता और शोषितों की आवाज बनता है, तो सत्ता और सिस्टम को झुकना ही पड़ता है। जशपुर प्रशासन का यह त्वरित निर्देश उन भ्रष्ट अधिकारियों के मुंह पर तमाचा है जो सरकारी योजनाओं को अपनी कमाई का जरिया समझते थे।