पेयजल संकट से जूझ रहे पहाड़ी कोरवा, 1 किमी दूर निजी जमीन पर बन रहा कुआं—ग्रामीणों में आक्रोश
बगीचा (जनपद पंचायत क्षेत्र), महनई:
जनपद पंचायत बगीचा अंतर्गत ग्राम पंचायत महनई के गराज वार्ड क्रमांक 6 में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के लोग भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि लगभग 20 से 25 घरों के लोग खुद से ढोंड़ी (खड्डा) खोदकर दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, बस्ती में उपलब्ध पानी पत्तियों के सड़ने-गलने से पूरी तरह दूषित हो चुका है, बावजूद इसके मजबूरी में उसी पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। वहीं, इस गंभीर समस्या के समाधान की बजाय ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा स्वीकृत कुएं का निर्माण बस्ती से करीब 1 किलोमीटर दूर एक निजी भूमि पर कराया जा रहा है, जहां आसपास कोई आबादी भी नहीं है।

ग्रामीणों का आरोप:
पहाड़ी कोरवा समुदाय के लोगों का कहना है कि बस्ती के लिए लगभग डेढ़ लाख रुपए की लागत से कुआं स्वीकृत हुआ था, लेकिन सरपंच-सचिव की मनमानी के चलते निर्माण कार्य रविंद्र यादव नामक व्यक्ति की निजी जमीन पर किया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर केवल एक ही परिवार के लोग कार्य कर रहे हैं और मनरेगा के तहत फर्जी हाजिरी भी भरी जा रही है।

जिम्मेदारों की स्वीकारोक्ति:
मामले को लेकर जब ग्राम पंचायत सचिव रामचरण यादव से चर्चा की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि कुआं पहाड़ी कोरवा बस्ती में बनना था, लेकिन वर्तमान में निर्माण कार्य निजी भूमि पर कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वीकृत स्थान से 100 मीटर के भीतर कहीं भी निर्माण कराया जा सकता है, हालांकि जिस स्थान पर निर्माण हो रहा है, वहां आसपास कोई आबादी नहीं है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल:
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जहां 20-25 परिवार पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं, वहां उनकी जरूरतों को नजरअंदाज कर सुनसान इलाके में कुआं निर्माण क्यों कराया जा रहा है? क्या पंचायत की प्राथमिकता ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकता नहीं है?
शिकायत के बाद भी नहीं मिली पावती:
ग्रामीणों ने बताया कि वे अपनी समस्या लेकर जनपद कार्यालय भी पहुंचे और आवेदन पत्र सौंपा, लेकिन उन्हें न तो आवेदन की रसीद दी गई और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई का आश्वासन मिला।
निष्कर्ष:
एक ओर सरकार आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए योजनाएं चला रही है, वहीं जमीनी स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण पहाड़ी कोरवा जैसे समुदाय आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है।








