जशपुर में मधुमक्खी पालन से महक रही किसानों की किस्मत: राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मिल रहा भारी अनुदान
जशपुरनगर | 5 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में परंपरागत खेती के साथ-साथ अब 'मीठी क्रांति' की शुरुआत हो रही है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राज्य योजना के तहत जिले के किसान मधुमक्खी पालन को अपनाकर अपनी आय को दोगुना कर रहे हैं। वर्तमान में जिले के 20 चयनित कृषकों को इस योजना के तहत आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है।


किसानों को मिल रहा भारी अनुदान
योजना के अंतर्गत सरकार मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए आवश्यक उपकरणों पर भारी सब्सिडी दे रही है:
- बी-बॉक्स एवं कॉलोनी: प्रति यूनिट ₹1600 का अनुदान।
- मधुमक्खी छत्ता: ₹800 की सहायता।
- मधु निष्कासन यंत्र (Honey Extractor): ₹8000 का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
फसलों की पैदावार में 25-30% की वृद्धि
विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है। मधुमक्खियां उत्कृष्ट 'परागकण' (Pollinators) हैं। इनके माध्यम से:
सरसों, लीची, आम, सूरजमुखी और धनिया जैसी फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
परागण की प्रक्रिया से फलों की गुणवत्ता और संख्या दोनों बढ़ती है।
यह टिकाऊ और लाभकारी कृषि के लिए एक आवश्यक कड़ी है।
स्वरोजगार और कम लागत का मॉडल
मधुमक्खी पालन उन युवाओं और महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है जिनके पास कम भूमि है।
कम निवेश: इसमें बड़ी जमीन या भारी मशीनरी की जरूरत नहीं होती।
विविध उत्पाद: शहद के अलावा मोम, रॉयल जेली और पराग (Pollen) जैसे उत्पादों की बाजार में भारी मांग है।
पर्यावरण हितैषी: यह जैव विविधता बनाए रखने और प्राकृतिक संतुलन को सुधारने में सहायक है।
विशेषज्ञों की सलाह: कीटनाशकों से बचें
कृषि वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मधुमक्खियों की संख्या घट रही है। ऐसे में 'मधुमक्खी-अनुकूल' खेती अपनाना समय की मांग है। सही वैज्ञानिक तकनीक और मौसम के प्रबंधन से किसान साल में कई बार शहद का उत्पादन कर सकते हैं।
निष्कर्ष: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर में इस योजना का उद्देश्य न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जिले को शहद उत्पादन का केंद्र बनाना भी है।





