जशपुर में ‘सरगुजा ओलंपिक’ का महाकुंभ: 56 हजार से अधिक खिलाड़ी दिखा रहे दम, मुख्यमंत्री साय की पहल से प्रतिभाओं को मिला नया आसमान

जशपुर में ‘सरगुजा ओलंपिक’ का महाकुंभ: 56 हजार से अधिक खिलाड़ी दिखा रहे दम, मुख्यमंत्री साय की पहल से प्रतिभाओं को मिला नया आसमान

जशपुरनगर | 30 जनवरी, 2026

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुसार छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित 'सरगुजा ओलंपिक 2025-26' ने आदिवासी अंचल जशपुर में खेलों की नई लहर पैदा कर दी है। जिले के आठों विकासखंडों में 28 जनवरी से शुरू हुआ यह खेल महोत्सव 3 फरवरी तक चलेगा, जहाँ ग्रामीण अंचलों की छिपी हुई प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने का एक राष्ट्रीय स्तर का मंच मिल रहा है।

आंकड़ों में भारी उत्साह: जशपुर से 56,948 खिलाड़ियों का रिकॉर्ड पंजीयन

जशपुर जिले में खेलों के प्रति दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार रिकॉर्ड 56,948 खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन कराया है। विकासखंड वार सहभागिता कुछ इस प्रकार है:

पत्थलगांव: 12,858 प्रतिभागी (सर्वाधिक)

कुनकुरी: 10,185 प्रतिभागी

बगीचा: 6,764 प्रतिभागी

जशपुर: 6,492 प्रतिभागी

फरसाबहार: 6,397 प्रतिभागी

कांसाबेल: 5,324 प्रतिभागी

दुलदुला: 4,592 प्रतिभागी

मनोरा: 4,336 प्रतिभागी

12 खेल विधाओं में दो वर्गों के बीच भिड़ंत

प्रतियोगिता को दो श्रेणियों में बांटा गया है— जूनियर वर्ग (14 से 17 वर्ष) और सीनियर वर्ग (18 वर्ष से अधिक)। मैदान में कुल 12 खेलों के लिए रोमांचक मुकाबले हो रहे हैं:

व्यक्तिगत खेल: एथलेटिक्स (दौड़, कूद, थ्रो), तीरंदाजी (इंडियन राउंड), बैडमिंटन, कुश्ती और कराते।

दलीय खेल: फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, रस्साकसी और बास्केटबॉल।

आत्मविश्वास और पहचान का नया जरिया

संचालनालय खेल एवं युवा कल्याण के मार्गदर्शन में आयोजित यह ओलंपिक केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि दूरस्थ वनांचलों के युवाओं में अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का माध्यम है। जशपुर के साथ-साथ सरगुजा संभाग के सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़ जिलों के खिलाड़ी भी इस महाकुंभ का हिस्सा बन रहे हैं।

ऐतिहासिक पहल से संवरेगा भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि सरगुजा ओलंपिक ग्रामीण खिलाड़ियों को सीधे राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करेगा। मुख्यमंत्री की यह पहल संभाग की खेल संस्कृति को सशक्त करने और नई प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रही है।