कैलाश गुफा शिव मंदिर विवाद: 5 फरवरी से विशाल जन आंदोलन की चेतावनी, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
जशपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल और आस्था के केंद्र कैलाश गुफा में स्थित शिव मंदिर को खोलने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कोरोना काल से बंद पड़े इस मंदिर के कपाट खुलवाने के लिए अब स्थानीय समाज और सनातन संत समाज ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। इस संबंध में कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपकर 5 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन जन आंदोलन शुरू करने की आधिकारिक चेतावनी दी गई है।

प्रमुख मुद्दे और विवाद का कारण
शिकायती पत्र के अनुसार, पूज्य गहिरा गुरु जी द्वारा भक्तों और संतों के सहयोग से निर्मित इस मंदिर को वर्तमान अध्यक्ष श्री बभ्रुवाहन सिंह द्वारा लंबे समय से बंद रखा गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए हैं:
वादाखिलाफी का आरोप: सनातन संत समाज के सचिव द्वारा पूर्व में 45 दिनों के भीतर मंदिर खोलने का लिखित आश्वासन दिया गया था, जो तीन माह बीतने के बाद भी पूरा नहीं हुआ।
भक्तों के साथ अभद्रता: आरोप है कि 21 सितंबर 2025 को मंदिर खुलवाने का निवेदन करने गए 81 वर्षीय बुजुर्ग भक्त श्री सियाराम यादव के साथ मारपीट और गाली-गलौज की गई, जिससे श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश और भय है।

झूठी घोषणा: 31 दिसंबर 2025 को हुई आम सभा में मकर संक्रांति तक मंदिर खोलने की लिखित शपथ ली गई थी, लेकिन कपाट आज भी बंद हैं।
समिति के पुनर्गठन की मांग
समाज के लोगों का कहना है कि कैलाश गुफा में अभी तक किसी वैध समिति का गठन नहीं किया गया है। भक्तों ने मांग की है कि मंदिर के सुचारू संचालन के लिए एक नवीन समिति का गठन किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

प्रशासन को अल्टीमेटम
ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि यदि 2 फरवरी 2026 तक मंदिर के कपाट नहीं खोले जाते हैं, तो समस्त हिंदू समाज और संत समाज मिलकर 5 फरवरी (मंगलवार) से कैलाश गुफा में विशाल जन आंदोलन करेगा। इस आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
प्रतिलिपि प्रेषित: यह ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, सांसद राधेश्याम राठिया, सांसद चिंतामणि महाराज, स्थानीय विधायक, पुलिस अधीक्षक और RSS जिला जशपुर सहित सभी संबंधित विभागों को आवश्यक कार्यवाही हेतु भेज दिया गया है।





