सफलता की कहानी: जशपुर के किसान मधुसुदन ने गौपालन से लिखी समृद्धि की नई इबारत

सफलता की कहानी: जशपुर के किसान मधुसुदन ने गौपालन से लिखी समृद्धि की नई इबारत

जशपुर | 25 मार्च 2026 खेती-किसानी के साथ अगर जुनून और सही तकनीक मिल जाए, तो पशुपालन मुनाफे का एक बड़ा जरिया बन सकता है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के नगर पंचायत बगीचा के निवासी किसान मधुसुदन भगत आज इसी बात की मिसाल पेश कर रहे हैं। पिछले कई वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण से उन्होंने गौपालन को एक सफल और प्रेरणादायक मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है।

2005 से शुरू हुआ सफर, आज बना बड़ा व्यवसाय

​मधुसुदन भगत वर्ष 2005 से बड़े स्तर पर गौपालन का कार्य कर रहे हैं। उनके पास वर्तमान में कुल 27 गायें हैं। इनमें जर्सी नस्ल की गायों के साथ-साथ स्थानीय मिक्स ब्रीड (मिश्रित नस्ल) की गायें भी शामिल हैं। उनकी बेहतर देखभाल का ही नतीजा है कि आज वे प्रतिदिन लगभग 60 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं, जिसकी पूरी खपत स्थानीय नगर में ही हो जाती है।

आधुनिक खान-पान और प्रबंधन

​दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए मधुसुदन एक विशेष और पारंपरिक तरीका अपनाते हैं। वे बताते हैं कि:

  • पौष्टिक आहार: पशुओं को मक्के का चूरा खौलते पानी में पकाकर खिलाया जाता है, जिसे गायें न केवल चाव से खाती हैं, बल्कि इससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है।
  • उच्च क्षमता: उनकी कुछ गायें सुबह और शाम मिलाकर 10 से 12 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती हैं।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच: बगीचा स्थित पशु चिकित्सालय के माध्यम से पशुओं का समय पर टीकाकरण और नियमित इलाज सुनिश्चित किया जाता है।

गोबर से जैविक खाद: दोहरी कमाई

​मधुसुदन केवल दूध बेचकर ही लाभ नहीं कमा रहे, बल्कि वे अपशिष्ट प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देते हैं।

    1. वर्मी कम्पोस्ट: दिन में दो बार गोबर एकत्रित कर उससे वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) तैयार की जाती है।
    2. उन्नत खेती: इस जैविक खाद का उपयोग वे अपने खेतों में करते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता सुधरती है और रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च बचता है।

​"मधुसुदन भगत की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक मार्गदर्शक है। यह साबित करता है कि विभागीय सहयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर पशुपालन को एक मजबूत आय का साधन बनाया जा सकता है।"