जशपुर में प्रकृति और ममता का संगम: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 'मातृत्व वन' का किया लोकार्पण

जशपुर में प्रकृति और ममता का संगम: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 'मातृत्व वन' का किया लोकार्पण

जशपुरनगर | 28 मार्च 2026

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर प्रवास के दौरान सर्किट हाउस परिसर में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित 'मातृत्व वन' का भव्य लोकार्पण किया। लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में फैला यह वन पर्यावरण संरक्षण और मातृशक्ति के प्रति सम्मान का एक अनूठा उदाहरण पेश कर रहा है।

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को मिली नई ऊँचाई

लोकार्पण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति अपने सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। इस पहल के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों ने अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया, जिससे यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरणीय बल्कि भावनात्मक रूप से भी विशेष बन गया।

400 से अधिक पौधों से महकेगा सर्किट हाउस परिसर

मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है। इनमें पर्यावरणीय और औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधे शामिल हैं, जैसे:

  • सजावटी एवं छायादार: टिकोमा, झारुल, सीताअशोक, गुलमोहर।

  • औषधीय एवं फलदार: लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन और जामुन।

ये पौधे आने वाले समय में जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

प्रमुख जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव और जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव उपस्थित रहे।

प्रशासनिक टीम से सरगुजा कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी श्री शशिकुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

नयी पीढ़ी के लिए संदेश

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल से आने वाली पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी। यह 'हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता' के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।