सोगड़ा डैम की मछलियों से संवर रही आदिवासियों की किस्मत: सेंट्रल नोडल ऑफिसर ने सराहा जशपुर का मत्स्य पालन मॉडल

सोगड़ा डैम की मछलियों से संवर रही आदिवासियों की किस्मत: सेंट्रल नोडल ऑफिसर ने सराहा जशपुर का मत्स्य पालन मॉडल

जशपुरनगर | 27 जनवरी 2026 प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के तहत एडिशनल सेन्ट्रल नोडल ऑफिसर श्री बी.के. पुरूशटी ने मनोरा विकासखण्ड स्थित सोगड़ा डैम का दौरा किया। यहाँ उन्होंने आदिवासी कमल मछुआ सहकारी समिति द्वारा किए जा रहे मत्स्य पालन कार्यों का सूक्ष्म अवलोकन किया और समिति के सदस्यों की आर्थिक प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की।

2018 से मछली पालन कर आत्मनिर्भर बन रही समिति

अवलोकन के दौरान समिति के अध्यक्ष ने बताया कि आदिवासी कमल मछुआ सहकारी समिति वर्ष 2018 से लगातार इस डैम में मछली पालन कर रही है। वर्तमान में:

मत्स्य उत्पादन: प्रति वर्ष लगभग 1500 किलोग्राम मछली का उत्पादन हो रहा है।

आमदनी: समिति को मछली पालन से सालाना 2 लाख रुपये की आय हो रही है।

अतिरिक्त लाभ: डैम के किनारों पर की जा रही सब्जी की खेती से भी सदस्य अलग से मुनाफा कमा रहे हैं।

विभाग द्वारा समिति को जाल, मछली बीज, आइस बॉक्स और बंद ऋतु (मछली पकड़ने पर रोक के समय) के दौरान सदस्यों को 3 हजार रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की जा रही है।

सफलता की कहानी: ईश्वर राम ने मछली संग बतख और सूकर पालन से आय की दोगुनी

निरीक्षण के दौरान ग्राम सोगड़ा के प्रगतिशील किसान श्री ईश्वर राम की सफलता भी चर्चा का विषय रही। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का लाभ उठाकर अपनी निजी जमीन पर 1.20 हेक्टेयर में तालाब निर्माण कराया है।

अनुदान: विभाग की ओर से उन्हें तालाब निर्माण के लिए 5.04 लाख और मत्स्य आहार (इनपुट्स) के लिए 2.88 लाख रुपये की अनुदान राशि मिली।

शुद्ध आय: ईश्वर राम अब सालाना 5 लाख रुपये की शुद्ध आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग: उन्होंने आय को दोगुना करने के लिए मछली पालन के साथ-साथ बतख और सूकर पालन को भी अपनाया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।

नोडल ऑफिसर श्री पुरूशटी ने शासन की योजनाओं के इस सफल जमीनी क्रियान्वयन की सराहना की और इसे अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक बताया।