बदहाली के आंसू रो रहा कांसाबेल यात्री प्रतीक्षालय: भीषण गर्मी में यात्री बेहाल, नशेड़ियों का बना सुरक्षित ठिकाना

बदहाली के आंसू रो रहा कांसाबेल यात्री प्रतीक्षालय: भीषण गर्मी में यात्री बेहाल, नशेड़ियों का बना सुरक्षित ठिकाना

कांसाबेल। भीषण गर्मी के इस दौर में जहां आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है, वहीं कांसाबेल स्थित यात्री प्रतीक्षालय अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। कभी यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया यह प्रतीक्षालय अब असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का अड्डा बनकर रह गया है। स्थिति इतनी भयावह है कि यात्री यहाँ बैठने के बजाय बाहर धूप में खड़े रहना बेहतर समझ रहे हैं।

गंदगी का अंबार और असहनीय दुर्गंध

​प्रतीक्षालय के भीतर चारों ओर गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है। सफाई के अभाव में यहाँ गंदगी और बदबू रहती हैं और भीषण दुर्गंध के कारण पांच मिनट बैठना भी दूभर हो गया है। सुलभ शौचालय और आसपास के कोनों को नशेड़ियों ने पूरी तरह से प्रदूषित और पान गुटका खा कर रंग बिरंगा दिया है।

न पंखे, न लाइट: अंधेरे का फायदा उठा रहे असामाजिक तत्व

​सुविधाओं के नाम पर यह प्रतीक्षालय पूरी तरह शून्य हो चुका है।

  • बिजली गुल: प्रतीक्षालय में न तो लाइट की व्यवस्था है और न ही पंखे चल रहे हैं।
  • अंधेरे का साम्राज्य: शाम ढलते ही यहाँ अंधेरा छा जाता है, जिसका फायदा उठाकर नशेड़ी और जुआरी यहाँ अपनी महफिल जमा लेते हैं।
  • यात्रियों में भय: सुरक्षा और व्यवस्था की कमी के कारण महिलाएं और परिवार यहाँ रुकने से कतराते हैं।

भीषण गर्मी में यात्रियों की फजीहत

​पारा 40 डिग्री के पार जा रहा है, ऐसे में बस के इंतजार में खड़े यात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

"प्रतीक्षालय की हालत देखकर लगता ही नहीं कि यह इंसानों के बैठने के लिए है।  शराब और कोरेक्स की बोतलें और गंदगी बदबू है। गर्मी में बिना पंखे के बैठना असंभव है।" > — एक व्यथित यात्री

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

​स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रतीक्षालय की तत्काल सफाई कराई जाए, बिजली-पंखों की मरम्मत हो और यहाँ पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि नशेड़ियों के आतंक से मुक्ति मिल सके। यदि जल्द ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो जाएगी।