खेती के साथ मधुमक्खी पालन: कम लागत में किसानों के लिए मुनाफे का नया मंत्र

खेती के साथ मधुमक्खी पालन: कम लागत में किसानों के लिए मुनाफे का नया मंत्र

जशपुरनगर | 11 अप्रैल 2026

जशपुर जिले में किसानों की आय दोगुनी करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राज्य योजना के तहत एक विशेष पहल की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत जिले के 20 चयनित कृषकों को मधुमक्खी पालन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

योजना के तहत मिलने वाला अनुदान

सरकार मधुमक्खी पालन को सुलभ बनाने के लिए उपकरणों पर भारी सब्सिडी दे रही है:

  • मधुमक्खी पेटी (B-Box) व कॉलोनी: ₹1,600 का अनुदान।

  • मधुमक्खी छत्ता: ₹800 की सहायता।

  • मधु निष्कासन यंत्र (Honey Extractor): ₹8,000 की आर्थिक मदद।

फसलों की पैदावार में होगा इजाफा

विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमक्खियां केवल शहद ही नहीं देतीं, बल्कि परागण (Pollination) के जरिए फसलों की गुणवत्ता और मात्रा भी बढ़ाती हैं। सरसों, लीची, आम, अमरूद और सूरजमुखी जैसी फसलों में मधुमक्खी पालन से पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण

मधुमक्खी पालन ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए आय का एक बेहतरीन जरिया बन रहा है। शहद के साथ-साथ बाजार में मोम और रॉयल जेली की भी भारी मांग है। खास बात यह है कि इसके लिए अधिक भूमि की आवश्यकता नहीं होती, जिससे छोटे किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं।

पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी

जैव विविधता बनाए रखने में मधुमक्खियों का योगदान अमूल्य है। हालांकि, कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से इनकी संख्या पर बुरा असर पड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने किसानों को 'मधुमक्खी-अनुकूल खेती' अपनाने और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करने की सलाह दी है ताकि पर्यावरण और जेब दोनों सुरक्षित रहें।

निष्कर्ष: यदि सही प्रबंधन और प्रशिक्षण के साथ मधुमक्खी पालन किया जाए, तो यह जशपुर के किसानों के लिए एक स्थायी और लाभकारी व्यवसाय साबित होगा।