बगीचा क्षेत्र में जंगली हाथी के हमले से बुजुर्ग की मौत; वन विभाग ने प्रभावित गांवों में बढ़ाई निगरानी
जशपुर | 12 अगस्त 2026
जशपुर वनमण्डल अंतर्गत बगीचा वन परिक्षेत्र में जंगली हाथी के हमले से एक 71 वर्षीय बुजुर्ग की मृत्यु होने का दुखद मामला सामने आया है। घटना के बाद वन विभाग की टीम और त्वरित प्रतिक्रिया दल (RRT) ने क्षेत्र में गश्त तेज कर दी है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है।
झोपड़ी को पहुंचाया नुकसान, मौके पर ही हुई मौत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन परिक्षेत्र बगीचा के महादेवडांड परिसर (वनकक्ष क्रमांक RF-1259) में बीते 9 अगस्त से लगभग 16 जंगली हाथियों का दल विचरण कर रहा था। इसी दौरान, ग्राम घुघरी (कदमटोली) निवासी 71 वर्षीय मार्सेल लकड़ा, जो अपनी निजी भूमि पर बनी एक अस्थायी झोपड़ी में रह रहे थे, पर रात्रि लगभग 12:30 बजे एक जंगली हाथी ने हमला कर दिया।
हाथी ने झोपड़ी को क्षतिग्रस्त करते हुए बुजुर्ग को घसीटकर पटक दिया, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम, हाथी गश्ती दल और RRT ने मौके पर पहुंचकर वैधानिक कार्यवाही शुरू की। निरीक्षण के दौरान घटनास्थल पर हाथी के पदचिन्ह और गोबर पाए गए हैं।
परिजनों ने की थी गांव ले जाने की कोशिश: मौका पंचनामा के अनुसार, मृतक की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी। घटना से पूर्व उनके भाई जुलियस लकड़ा ने क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की जानकारी देते हुए उन्हें सुरक्षित गांव ले जाने का प्रयास किया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया और झोपड़ी में ही रुके रहे।
प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी, माईक व सायरन से मुनादी
घटना के बाद वन विभाग ने प्रभावित ग्रामों—घोघर, सरईपानी, घुघरी, रेंगोला, महुआडीह और बोडापहरी में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी है। हाथियों के दल की गतिविधियों पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
वन विभाग द्वारा माईक और सायरन के माध्यम से ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है और सुरक्षा के दृष्टिकोण से निम्नलिखित अपील की गई है:
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जंगलों की ओर न जाएं: हाथियों के संभावित आवागमन वाले मार्गों और जंगलों की तरफ जाने से बचें।
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रात में सावधानी रखें: रात्रि के समय अकेले घर से बाहर न निकलें।
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दूरी बनाए रखें: हाथियों को देखने, उनका पीछा करने या उनके समीप जाकर फोटो/वीडियो बनाने का जोखिम न उठाएं।
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सूचना तत्काल दें: क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी दिखते ही तुरंत निकटतम वन अमले को सूचित करें और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
वन प्रशासन का कहना है कि मानव-हाथी द्वंद्व को न्यूनतम करने के लिए लगातार प्रयास और निगरानी जारी है।














