बिहान योजना से संवरी संज्योति की जिंदगी: बैंक सखी बन प्रतिमाह कर रहीं 9 लाख का लेन-देन, बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

बिहान योजना से संवरी संज्योति की जिंदगी: बैंक सखी बन प्रतिमाह कर रहीं 9 लाख का लेन-देन, बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

कांसाबेल के टांगरगाँव की संज्योति चौहान ने स्व-सहायता समूह से 68 हजार का ऋण लेकर शुरू की बैंकिंग सेवा; अब ग्रामीणों को गाँव में ही मिल रही डिजिटल भुगतान और बीमा सुविधाएं।

जशपुर/कांसाबेल। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में छत्तीसगढ़ की 'बिहान योजना' ग्रामीण महिलाओं के जीवन में खुशहाली और आर्थिक स्वावलंबन का नया अध्याय लिख रही है। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल आजीविका के नए साधन अपना रही हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रही हैं। इसी कड़ी में कांसाबेल विकासखंड के ग्राम टांगरगाँव की श्रीमती संज्योति चौहान ने 'बैंक सखी' के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

68 हजार के ऋण से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर

चांदनी स्व-सहायता समूह की सदस्य संज्योति चौहान ने बताया कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में उन्होंने पहला कदम समूह से जुड़कर उठाया। बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करने के लिए उन्होंने समूह के माध्यम से 68 हजार रुपये का ऋण लिया। इस प्रारंभिक पूंजी की मदद से उन्होंने वर्ष 2019 में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से संबद्ध होकर बतौर 'बैंक सखी' कार्य करना प्रारंभ किया।

किराना दुकान के साथ दे रही हैं डिजिटल बैंकिंग सेवाएं

आज संज्योति चौहान न केवल सफलता से एक किराना दुकान संचालित कर रही हैं, बल्कि गाँव के लोगों को घर पहुंचे बैंकिंग सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही हैं। उनके केंद्र पर:

  • हर महीने 8 से 9 लाख रुपये का वित्तीय लेन-देन होता है।

  • ग्रामीणों को डिजिटल भुगतान, आधार आधारित नकद निकासी, और पैसे ट्रांसफर की सुविधा मिलती है।

  • इसके साथ ही वे विभिन्न शासकीय बीमा योजनाओं और अन्य वित्तीय सेवाओं से ग्रामीणों को जोड़ रही हैं।

परिवार का सहारा बनीं, मुख्यमंत्री का जताया आभार

इस पहल से संज्योति को हर महीने सम्मानजनक आय प्राप्त हो रही है, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण बेहतर ढंग से कर पा रही हैं। समाज में उनके प्रति सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ा है। अपनी इस उपलब्धि और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है।

"बिहान योजना ने मुझे अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। आज मैं आत्मनिर्भर होकर न सिर्फ अपने परिवार की मदद कर रही हूँ, बल्कि गाँव के लोगों को भी सहूलियत पहुँचा पा रही हूँ।"

श्रीमती संज्योति चौहान, बैंक सखी (ग्राम टांगरगाँव)